प्रेमचंद जी का पृथ्वी पर अवतरण 31 जुलाई 1880 वाराणसी के लमही नामक गांव में हुआ। उनके पिता लमही में डाक मुंशी थे. मुंशी प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय
प्रेमचंद जी का पृथ्वी पर अवतरण 31 जुलाई 1880 वाराणसी के लमही नामक गांव में हुआ। उनके पिता लमही में डाक मुंशी थे. मुंशी प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय
एकांकी अर्थात एक अंक वाला लघु नाटक जिसमें जीवन की किसी एक विशेष घटना को कम से कम समय में तथा कम पात्रों के माध्यम से दर्शाया जाए। दीपदान ऐसी
पात्र- मालती ( महेश्वर की पत्नी ), महेश्वर ( डॉक्टर जो गैंग्रीन का इलाज करता है और मालती का पति ) टिटी( मालती और महेश्वर का बेटा ) और लेखक
अगर हम संप्रेषण की उपयोगिता की बात करें तो मानव की उत्पत्ति से ही संप्रेषण का महत्व जग जाहिर है। क्योंकि जब भाषा नहीं था तब भी मानव संकेत संप्रेषण
प्रस्तावना- हिंदी कथा-साहित्य के विकास में मुंशी प्रेमचंद का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक माना जाता है। प्रेमचंद ने हिंदी कहानी को केवल मनोरंजन की विधा न रहने देकर उसे
अपनी संवेदना, विचार और भावनाओं को किसी अन्य व्यक्ति के साथ में साझा करने को संप्रेषण कहते हैं। संप्रेषण आज के समय में एक सामान्य सी प्रक्रिया है। जो समाज
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ (1911-1987) का निबंध ‘रूढ़ि और मौलिकता’, जो उनके संग्रह ‘आत्मनेपद’(1) में संकलित है, केवल कला और साहित्य पर एक चिंतन-मनन नहीं है, बल्कि यह उस युग की
क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया की सबसे अनमोल वस्तु क्या हो सकती है? आप में से कोई कहेगा की दौलत है,घर प्रेम,धन,पद,ऐश्वर्य,पैसा – रूपया है परंतु गुलाम भारत
भाषा :– प्रकृति में पाए जाने वाले जीव,एक विशेष ध्वनि के माध्यम से आपस में वार्तालाप करते हैं जिससे वे अपनी अनुभूतियों को व्यक्त करते हैं इसी अनुभूति का ध्वनि
कहानी गद्य साहित्य की विश्व जगत में बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय विद्या है। मानव समाज और संस्कृति को बनाए रखने तथा उसे अनंत काल तक सुरक्षित रखने के लिए जिस