सार हरिशंकर परसाई(1924 – 1995) हिंदी व्यंग्य साहित्य के प्रमुख स्तंभ हैं, जिन्होंने मध्यवर्गीय समाज की विसंगतियों को व्यंग्य के माध्यम से उजागर किया। उनकी रचना ‘वह जो आदमी है
सार हरिशंकर परसाई(1924 – 1995) हिंदी व्यंग्य साहित्य के प्रमुख स्तंभ हैं, जिन्होंने मध्यवर्गीय समाज की विसंगतियों को व्यंग्य के माध्यम से उजागर किया। उनकी रचना ‘वह जो आदमी है
युद्ध हमेशा नुकसान का सौदा रहा है। भले ही कोई देश संख्या पक्ष में जीत जाए। या फिर बोले हमने उसको घुटने टेकने पर मंजूर कर दिया। लेकिन कहीं न
एकांकी अर्थात एक अंक वाला लघु नाटक जिसमें जीवन की किसी एक विशेष घटना को कम से कम समय में तथा कम पात्रों के माध्यम से दर्शाया जाए। दीपदान ऐसी
पात्र- मालती ( महेश्वर की पत्नी ), महेश्वर ( डॉक्टर जो गैंग्रीन का इलाज करता है और मालती का पति ) टिटी( मालती और महेश्वर का बेटा ) और लेखक
अगर हम संप्रेषण की उपयोगिता की बात करें तो मानव की उत्पत्ति से ही संप्रेषण का महत्व जग जाहिर है। क्योंकि जब भाषा नहीं था तब भी मानव संकेत संप्रेषण
प्रस्तावना- हिंदी कथा-साहित्य के विकास में मुंशी प्रेमचंद का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक माना जाता है। प्रेमचंद ने हिंदी कहानी को केवल मनोरंजन की विधा न रहने देकर उसे
अपनी संवेदना, विचार और भावनाओं को किसी अन्य व्यक्ति के साथ में साझा करने को संप्रेषण कहते हैं। संप्रेषण आज के समय में एक सामान्य सी प्रक्रिया है। जो समाज
विश्व मानचित्र पर प्रतिस्थापित देशों के बीच जो सबसे ज्वलंत और महत्वपूर्ण मसला है, वह है — सुरक्षा। हर राष्ट्र अपनी आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहता है
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ (1911-1987) का निबंध ‘रूढ़ि और मौलिकता’, जो उनके संग्रह ‘आत्मनेपद’(1) में संकलित है, केवल कला और साहित्य पर एक चिंतन-मनन नहीं है, बल्कि यह उस युग की