प्रेमचंद द्वारा रचित ‘ईदगाह’ हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध कहानियों में से एक है, जिसका प्रकाशन 1933 में हुआ। इस कहानी का मुख्य पात्र हामिद है तथा अन्य प्रमुख पात्रों में
प्रेमचंद द्वारा रचित ‘ईदगाह’ हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध कहानियों में से एक है, जिसका प्रकाशन 1933 में हुआ। इस कहानी का मुख्य पात्र हामिद है तथा अन्य प्रमुख पात्रों में
नवजागरण काल ने व्यापक तौर पर भारतीय जीवन, भाषा, साहित्य, दर्शन और विचार को प्रभावित किया। स्वयं भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की रचनात्मक प्रतिभा इस पुनर्जागरण काल से उन्नत रूप में जुटती
‘भारत-दुर्दशा’ नाटक को स्वयं भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने ‘नाट्यरासक’ को संज्ञा दी है, जो नवीन नाट्य-पद्धति का अनुकर्ता है। वस्तुतः नाट्य-रासक १८ उपरूपको में से एक है। नाट्य-रासक का लक्षण बताते
‘दीवार में एक खड़की रहती थी’ विनोद कुमार शुक्ल का उपन्यास है। इसका प्रकाशन 1997 में हुआ। इस उपन्यास में एक साधारण जीवन और उसमें रहने वाले लोगों की छोटी-छोटी
‘कानों में कंगना’ राधिका रमण प्रसाद सिंह की पहली कहानी थी। जो 1913 में ‘हिंदू’ में प्रकाशित हुई। इस कहानी को शुक्ल जी ने अत्यंत भावुकता पूर्ण कहानी कहा है।
शेखर एक जीवनी प्रथम भाग- उत्थान का प्रकाशन 1941 दितीय भाग- संघर्ष का प्रकाशन 1944 शेखर एक जीवनी एक मनोवैज्ञानिक उपन्यास जिसके लेखक अज्ञेय हैं। इसके प्रथम भाग का प्रकाशन
सार हरिशंकर परसाई(1924 – 1995) हिंदी व्यंग्य साहित्य के प्रमुख स्तंभ हैं, जिन्होंने मध्यवर्गीय समाज की विसंगतियों को व्यंग्य के माध्यम से उजागर किया। उनकी रचना ‘वह जो आदमी है
एकांकी अर्थात एक अंक वाला लघु नाटक जिसमें जीवन की किसी एक विशेष घटना को कम से कम समय में तथा कम पात्रों के माध्यम से दर्शाया जाए। दीपदान ऐसी
पात्र- मालती ( महेश्वर की पत्नी ), महेश्वर ( डॉक्टर जो गैंग्रीन का इलाज करता है और मालती का पति ) टिटी( मालती और महेश्वर का बेटा ) और लेखक