युद्ध हमेशा नुकसान का सौदा रहा है। भले ही कोई देश संख्या पक्ष में जीत जाए। या फिर बोले हमने उसको घुटने टेकने पर मंजूर कर दिया। लेकिन कहीं न
युद्ध हमेशा नुकसान का सौदा रहा है। भले ही कोई देश संख्या पक्ष में जीत जाए। या फिर बोले हमने उसको घुटने टेकने पर मंजूर कर दिया। लेकिन कहीं न