सार हरिशंकर परसाई(1924 – 1995) हिंदी व्यंग्य साहित्य के प्रमुख स्तंभ हैं, जिन्होंने मध्यवर्गीय समाज की विसंगतियों को व्यंग्य के माध्यम से उजागर किया। उनकी रचना ‘वह जो आदमी है
सार हरिशंकर परसाई(1924 – 1995) हिंदी व्यंग्य साहित्य के प्रमुख स्तंभ हैं, जिन्होंने मध्यवर्गीय समाज की विसंगतियों को व्यंग्य के माध्यम से उजागर किया। उनकी रचना ‘वह जो आदमी है