अगर हम संप्रेषण की उपयोगिता की बात करें तो मानव की उत्पत्ति से ही संप्रेषण का महत्व जग जाहिर है। क्योंकि जब भाषा नहीं था तब भी मानव संकेत संप्रेषण
अगर हम संप्रेषण की उपयोगिता की बात करें तो मानव की उत्पत्ति से ही संप्रेषण का महत्व जग जाहिर है। क्योंकि जब भाषा नहीं था तब भी मानव संकेत संप्रेषण
प्रस्तावना- हिंदी कथा-साहित्य के विकास में मुंशी प्रेमचंद का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक माना जाता है। प्रेमचंद ने हिंदी कहानी को केवल मनोरंजन की विधा न रहने देकर उसे
अपनी संवेदना, विचार और भावनाओं को किसी अन्य व्यक्ति के साथ में साझा करने को संप्रेषण कहते हैं। संप्रेषण आज के समय में एक सामान्य सी प्रक्रिया है। जो समाज
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ (1911-1987) का निबंध ‘रूढ़ि और मौलिकता’, जो उनके संग्रह ‘आत्मनेपद’(1) में संकलित है, केवल कला और साहित्य पर एक चिंतन-मनन नहीं है, बल्कि यह उस युग की
क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया की सबसे अनमोल वस्तु क्या हो सकती है? आप में से कोई कहेगा की दौलत है,घर प्रेम,धन,पद,ऐश्वर्य,पैसा – रूपया है परंतु गुलाम भारत
साहित्य मुख्यतः दो विधाओं में रचा जाता है। जिसे हम गद्य और पद्य कहते हैं गद्य में कहानी नाटक उपन्यास आदि विधा आती हैं जबकि पद्य में प्रबंध, मुक्तक, कविता,
रचनात्मक लेखन में लिखित रूप के महत्व को हम इस रुप में समझ सकते हैं कि जब हम इतिहास का विभाजन करते हैं तो लिखित साक्ष्यों की प्राप्ति के आधार
जब आपको अपने मन की बात, भाव, विचार, आदि किसी दूसरे व्यक्ति से साझा करना हो तो आप किसी ने किसी भाषा का सहारा लेते हैं। हम जिस भाषा में
वैसे तो कक्षा में शिक्षक अमूमन अरस्तु का नाम हमारे सामने लेते रहते हैं जब कोई विद्यार्थी दार्शनिक तरह की बात करें तो जिससे हमें आभास लग जाता है कि
टिप्पण का नाम अक्सर हम सरकारी कार्यालयों के कामकाज में सुनते रहते हैं। जिसको इंग्लिश में नोट बोलते हैं। आज हम इसी विषय को जानेंगे और पढ़ेंगे कि टिप्पणी क्या