टिप्पण का नाम अक्सर हम सरकारी कार्यालयों के कामकाज में सुनते रहते हैं। जिसको इंग्लिश में नोट बोलते हैं। आज हम इसी विषय को जानेंगे और पढ़ेंगे कि टिप्पणी क्या
टिप्पण का नाम अक्सर हम सरकारी कार्यालयों के कामकाज में सुनते रहते हैं। जिसको इंग्लिश में नोट बोलते हैं। आज हम इसी विषय को जानेंगे और पढ़ेंगे कि टिप्पणी क्या
कहानी कहने और सुनने की परम्परा भारतवर्ष में बहुत पहले से है। भारतीय कहानी का एक रूप कादम्बरी में मिलता है और दूसरा विष्णु शर्मा द्वारा रचित पंचतन्त्र में। पंचतन्त्र
हिंदी कथा-साहित्य में आंचलिक चेतना को कलात्मक गरिमा और साहित्यिक प्रतिष्ठा प्रदान करने वाले रचनाकारों में फणीश्वरनाथ रेणु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और विशिष्ट है। रेणु ने हिंदी कहानी को
यदि हम ‘कहानी’ के अर्थ की बात करें तो ‘कहानी’ शब्द पाश्चात्य अंग्रेजी के ‘शॉर्ट स्टोरी’ का समानार्थी है। जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ‘कहना’। वही संस्कृत में ‘कथ’ धातु
कोसी का घटवार कहानी शेखर जोशी द्वारा लिखी गई है। यह कहानी 1958 में प्रकाशित हुई। कोसी का घटवार पूर्वदिप्ति शैली में लिखी गई एक आंचलिक कहानी है। कहानी में
परिंदे, निर्मल वर्मा द्वारा रचित एक प्रसिद्ध यद्यपि आरम्भिक कहानी है। यह कहानी पूर्व दीप्ति शैली (फ्लैशबैक शैली), प्रतीकात्मक शैली तथा मनोविश्लेषणात्मक शैली के गुंफन से अपना आकार ग्रहण करता
‘धरती धन न अपना’ उपन्यास ‘जगदीश चन्द्र’ द्वारा रचित उपन्यास है। यह उपन्यास पंजाब के होशियारपुर जिले के दोआब क्षेत्र के दलित समाज पर केंद्रित है। इसका प्रकाशन सन् 1972
उसने कहा था – तात्विक समीक्षा प्रस्तावना : हिंदी कहानी का आरंभिक स्वरूप नीति-कथा, लोककथा और उपदेशात्मक आख्यानों से निर्मित था। बीसवीं शताब्दी के आरंभ तक आते-आते हिंदी कथा साहित्य
‘कसप’ उपन्यास सन् 1982 में प्रकाशित हुआ, जिसके लेखक हैं—मनोहर श्याम जोशी। ‘कसप’ एक कुमाऊंनी शब्द है जिसका मूलतः अर्थ है – ‘क्या जाने? ‘ या ‘क्या पता?’ उपन्यास की
जिन दलित साहित्यकारों ने आत्मकथा लिखी उनमें सबसे महत्वपूर्ण तथा प्रसिद्ध ओमप्रकाश वाल्मीकि जी का “जूठन” है जो दो खंडों में प्रकाशित है। इस आत्मकथा में ओमप्रकाश वाल्मीकि ने अपने