
हमने संचार की कई प्रविधियों का नाम सुना होगा जैसे- टेलीकम्युनिकेशंस, मास कम्युनिकेशन आदि। इन दो शब्दों में जो अंत का शब्द है कम्युनिकेशन अर्थात संचार। जब हम अपने विचार को किसी भी माध्यम से दूसरे तक पहुंचाते हैं उसे हम सफल संचार कहते हैं। संचार के माध्यम से हम सूचनाओं को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक साझा करते हैं।
इस लेख में हम संप्रेषण की प्रक्रिया को अच्छी तरह से समझने का प्रयास करेंगे की आखिर संप्रेषण की प्रक्रिया क्या है? इसके कौन-कौन से तत्व हैं? तथा इसमें कौन-कौन भाग लेता है?
ऊपर हमने आपको बताया कि संप्रेषण के माध्यम से प्रेषक अपने संदेश को किसी अन्य श्रोता तक उपस्थित संचार माध्यमों के माध्यम से पहुंचता है। संदेश प्राप्त होने के बाद श्रोता उस पर अपनी प्रतिक्रिया भी देता है। जिसे हम प्रतिपुष्टि या फीडबैक कहते हैं।
संप्रेषण के कुल पांच मूल तत्व है जिसके माध्यम से संप्रेषण की प्रक्रिया पूर्ण होती है। हम इस लेख में संप्रेषण की प्रक्रिया के सभी मूल तत्वों का विस्तार पूर्वक अध्ययन करेंगे और उनके महत्व को भी जानने का प्रयास करेंगे।
संप्रेषण का अभिप्राय उस व्यक्ति या स्रोत से है। जो संप्रेषण की प्रक्रिया को प्रारंभ करता है। कोई भी संप्रेषण की प्रक्रिया तभी होगी जब कोई प्रेषक अपना संदेश अपने विचार, भावनाएं, संवेदनाएं आदि को प्रेषित करने का प्रयास करता है। अर्थात संप्रेषण की प्रक्रिया में प्रेषक अति आवश्यक अंग है। जब तक कोई प्रेषक नहीं होगा तब तक संप्रेषण की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो सकती।
यदि हम चाहते हैं कि संप्रेषण की प्रक्रिया अत्यधिक प्रभावी ढंग से हो तो प्रेषक के अंदर कुछ अच्छे गुण भी होने अति आवश्यक हैं अर्थात प्रेषक के पास एक अच्छी लेखन शैली हो जिसके माध्यम से अपने विचार को दूसरे से साझा कर सके। उसके पास पर्याप्त शब्दों का भंडार होना चाहिए ताकि वह कम शब्दों में अपनी बात को श्रोता तक प्रेषित कर सके। प्रेषक को भाषा का सुव्यवस्थित ज्ञान होना चाहिए क्योंकि एक स्पष्ट भाषा के माध्यम से ही एक स्पष्ट संप्रेषण की प्रक्रिया सुनिश्चित हो सकती है।
प्रेषक के बुद्धिमान और ज्ञानी व्यक्ति होने से उसके संप्रेषण की प्रक्रिया पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। प्रेषक को संबंधित विषय जिस पर उसको संप्रेषण करना है। उसका व्यवस्थित ज्ञान और अध्ययन है तो संप्रेषण की प्रक्रिया और भी अधिक प्रभावित होती है। जिससे श्रोता अत्यधिक संतुष्टि की प्राप्ति करता है
संप्रेषण की प्रक्रिया में माध्यम एक सेतु की तरह कार्य करता है। जिसके द्वारा संदेश एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता है। वह माध्यम कुछ भी हो सकता है जैसे पारस्परिक बातचीत, व्यक्तिगत पत्राचार, सभा या मीटिंग, रेडियो, समाचार पत्र, टेलीविजन आदि हो सकते हैं। यह सभी माध्यम प्रेषक द्वारा संदेश प्रापक तक पहुंचाने का जरिया होते हैं। संप्रेषण की प्रक्रिया के दौरान हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जो हम माध्यम चुन रहे हैं वह बहुत ही स्पष्ट होना चाहिए जिससे हमारा संप्रेषण सफलतापूर्वक हो सके।
जब कोई प्रेषक लिखकर, बोलकर, चित्रों के माध्यम से, शारीरिक वेशभूषा और संकेत के माध्यम से अपने विचारों को प्रस्तुत करता है तब वह संदेश कहलाता है। जब कोई प्रेषक कोई संदेश भेजता है तो उसको यह ध्यान रखना चाहिए कि मेरे संदेश का विषय वस्तु क्या है? साथी उसको यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि जो मैं संदेश भेज रहा हूं उसमें भाषा कैसी है? प्रापक को समझ में आने वाली भाषा है कि नहीं।
प्रापक वह व्यक्ति होता है जो प्रेषक का संदेश प्राप्त करता है जब भी कोई संप्रेषण की प्रक्रिया होती है तो इस प्रक्रिया में प्रेषक और प्राप्त की भूमिका अहम होती है क्योंकि प्रेषक संप्रेषण की प्रक्रिया में एक छोर पर होता है तो दूसरी छोर पर प्रापक होता है। इन दोनों के माध्यम से ही संप्रेषण की प्रक्रिया पूर्ण होती है। जरूरी नहीं की प्रापक कोई एक व्यक्ति भी हो सकता है या पूरा एक जन समूह भी प्रापक हो सकता है। जैसे बड़ी-बड़ी जनसभाओं में जब कोई नेता अपना संदेश देता है तो वहां पर पूरा एक जनसमूह इकट्ठा होता है। तो यह भी एक संप्रेषण की प्रक्रिया है।
प्रतिक्रिया और फीडबैक संप्रेषण की प्रक्रिया का अंतिम चरण होता है। जिसमें प्रेषक द्वारा भेजे गए संदेश को जब प्रापक प्राप्त करता है और उस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करता है। तब संप्रेषण की प्रक्रिया पूर्ण मानी जाती है।
ईदगाह — प्रेमचंद की कहानी की आलोचनात्मक समीक्षा…https://www.bhojkhabar.com/%e0%a4%88%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%801/